नफरत के रंग

अंदर आने वाला एक खूबरू (सुंदर) अधेड़ उम्र का शख्स था। उसका रंग अंग्रेजों की तरह सुख सफेद था और ऑखें बिल्ली की तरह नीली। घनी दाढ़ी के बालों में हल्की सी सफेदी झलक रही थी। कुछ ही देर पहले स्कूटर से गिर जाने की वजह से अनवर हुसैन के दायें पैर में फ्रेक्चर हो गया था। इसलिए उस ने सोफे पर बैठे बैठे ही आने वाले का इस्तकबाल (अभिनंदन किया, "माफ़ कीजिये, मेरे पांव पर प्लास्टर होने की वजह से " "कोई बात नहीं,” अजनबी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम ने मकान में दाखिल होने दिया यह क्या कम है। अन्वेर हुसैन इस से पहले इस शख्स से नहीं मिला था लेकिन किसी से अचानक उस का नाम पूछ लेना भी मुनासिब नहीं होता, इसलिए उस ने सिर्फ इतना कहा,"माफ़ कीजिये आप को मैं ने पहचाना नहीं । “पहचान लेते तो क्या मुझे घर में दाखिल होने देते? अरे भई तुम्हारी शादी की सब से ज्यादा मुखालफत (विरोध) मैं ने की थी।"


"ओह आप अर्चना के मामा जी तो नहीं?" "ठीक पहचाना, मैं माधव राव पटवर्धन हूँ, अर्चना का मामा” इतने मैं अर्चना भी बाथरूम से बहार आ गयी थी। उसने सामने अचानक अपने मामा को देखा तो हैरान रह गयी। जिस मामा ने धमकी दी थी कि अगर अर्चना ने अनवर हुसैन से शादी की तो वोह दोनों को गोली से उदा देगा। आज वोह उस के घर में मौजूद था। वोह अपने मामा के पांव छूने के लिए आगे बढ़ी। "जीती रहो" पटवर्धन ने आशीर्वाद दिया। 


आप मूल हाथ धो लीजिये में चाय लेकर "आप मुंह हाथ धो लीजिये मैं चाय लेकर आती हूँ" "तुम्हारे घर आया हूँ, तुम ज़हर भी पिलाओगी तो पी लूंगा। लेकिन मरने से पहले एक ख्वाहिश (इच्छा) है कि तुम्हारे हाथ से बना हुआ चिकिन तंदुरी जरुर खाऊँगा” उसकी नीली शरारती ऑखें और ज्यादा चमकने लगीं “तुम चाय तो लाओ लेकिन भांजी चाय एक दम कड़क होनी चाहिए।” अर्चना किचन में चली गयी तो मामा ने वाशबेसिन के पास जाकर मुंह हाथ धोये फिर दोबारा सोफे पर आलती पालती मार कर बैठ गया “तुम्हें देख कर खुशी हुई स तुम भी किसी ब्राह्मण की तरह गोरे और सुंदर हो। तुम्हें देख कर यह अंदाज़ा नहीं होता कि तुम किस धर्म के हो। अनवर मुस्कुरा कर खामोश हो गया। “तुम ने मेरे यूं अच, निक यहाँ टपक पड़ने की वजह नहीं पूछी?" पटवर्धन ने अनवर से सवाल किया, “दरअसल मैं तुम्हारे घर में छुपने के लिए आया हूँ। मेरे नाम के वारंट जारी हो चुके हैं और पुलिस शिकारी कुत्तों की तरह मेरी तलाश में है।


"क्यूँ मामा जी आप ने तो हमें गोली से उदा देने की धमकी डी थी। क्या हमारी बजाय किसी और को गोली मार दी?" किचिन से बाहर आते हुए अर्चना ने पुछा। उसके हाथ में एक ट्रे थी जिस में तीन प्यालियाँ और एक प्लेट में बिस्किट थे।


"भांजी मैं ने तो आज तक किसी को शकर की गोली तक नहीं मारी” पटवर्धन ने चाय की प्याली ट्रे से उठाते हुए कहा, “लेकिन तुम बंदूक की रेंज में ज़रुर हो। तुम्हारे घर पर हरा निशान लग चूका है।


"कैसा निशान?" अनवर ने पुछा। तुम्हारे भाग जाने के रास्ते बंद हो चुके हैं दामाद जी” । उसने एक हक्हा लगाया," तुम तो तैमूर लंग हो फिर भी हमारी संजोगिता को भगा कर ले आये ।