गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा द्वारा संचालित नवोदित कलाकार समिति के कार्यक्रम में कुछ प्रतिभाशाली युवा संगीतकारों को सुनने का सुयोग प्राप्त हुआ। Ilkj0 dekj दुबे नवोदित गायक हैं। आज इन्होंने अपनी गायन कला का अच्छा परिचय दिया। इनकी दोनों रचनायें क्रमशः विलंबित और द्रुत एकताल में निब६ थीं। तान–प्रधान द्रुत खयाल- आओ आओ आओ बलमा की प्रस्तुति चमत्कारपूर्ण थी। होली-रंगी सारी गुलाबी चुनरिया में जहां श्रृंगारिक भावों की प्रधानता थी, वहीं वैष्णव जन तो तेने कहिये में भक्ति भावों की- और, सौरव ने दोनों ही के साथ न्याय किया। इनकी तानें भी अच्छी खासी तैयार हैं। हारमोनियम पर मोहम्मद अजीम ने अच्छी संगत कीतबले पर सुशान्त कृष्ण की संगत प्रशंसनी; रही। विलंबित में उनका ठेका भरने का अंदाज काफी संयत और समझदारी भरा था। द्रुत एकताल और द्रुत त्रिताल के वादन में उन्होंने ताज़गी का अनुभव कराया। होली और भजन में लग्गी-लडी का प्रयोग भी खुशनुमा था। fI}kFk 0ek ने सितार पर राग देस की सुंदर प्रस्तुति की। दोनों गते त्रिताल में थीं। अच्छी तैयारी और सुरीलापन है सिद्वार्थ के वादन में। डॉ मनीष शंकर की तबला संगति भी सूझबूझ भरी थी। दोनों कलाकारों का आपसी तालमेल भी प्रशंसनीय था। jktk flg ukh ने राग मालगुंजी कीमनभावन प्रस्तुति की। विलंबित एकताल की रचना वन में चरावत गइया और मध्यलय त्रिताल की रचना- रैन कारी डरावन लागी रे-शब्द और स्वर की दृष्टि से उच्चकोटि की थीं। राजेश ने दो भजन भी सुनाये-कबीर दास रचित हिरना समझ बूझ बन चरना और तुलसीदास कृत-ठुमक चलत रामचंद्र। राजेश शब्दों और स्वरों का भावपूर्ण प्रयोग करते हैं। वे स्वयं डूबकर गाते हैं और अपने श्रोताओं को भी संगीत सागर में आकंठ डूबो देते हैं। उनके तानों में सफाई है। उनके स्वभाव की ही तरह उनके गायन में भी एक विनम्रता और सौम्यता है। वे शब्द, स्वर, लय, ताल और भाव का स्वप्निल ताना-बाना बुनते हैं और अपने श्रोताओं को सम्मोहन की स्थिति में ले जाते हैंअमन पाथरे की तबला संगत और पं देवेंद्र कुमार वर्मा की हारमोनियम संगत भी प्रशंसनीय रही। इस सम्मोहक प्रस्तुति के बाद युवा संतूर वादक fn0;kk gfkr JhokLro ने राग निर्मल कौंस की सुंदर अवतारणा की। दिव्यांश पं भजन सोपोरी के सुशिष्य हैं, और यह नवीन राग भजनजी के सुपुत्र पं अभय रूस्तुम सोपोरी द्वारा माता निर्मला देवी के सम्मान में रचित है। सुमधुर आलाप, जोड और झाला के बाद साढ़े दस मात्रे में दिव्यांश ने गत बजाया। ताल कठिन था लेकिन दिव्यांश ने इसे अत्यन्त सूफियाना घराने की विशेषतायें मुखरित होती हैंतबले पर आनंद मिश्रा और जोडी पर मनसा सिंह नामधारी ने इनकी बहुत अच्छी संगत की। वादन की दृष्टि से भिन्न होते हुए भी आनंद और मनसा सिंह ने आपसी तालमेल और सामंजस्य का अच्छा परिचय दिया। इन तीनों युवा कलाकारों का भविष्य उज्जवल हैं।
गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा में प्रतिभाशाली संगीतकारों की प्रस्तुति